मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध- Essay on my favorite book in hindi

परीक्षाओं में मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध का सवाल आता है तो इसके लिए आप इस निबंध को पढ़ें आप किसी भी कक्षा में है 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 आप इस पोस्ट को पढ़कर meri priya pustak par nibandh हिंदी में लिख सकते हैं, इस निबंध में मैंने रामचरितमानस पुस्तक पर निबंध लिखा है अगर आपको कोई और पुस्तक पसंद है तो आप उसके बारे में भी लिख सकते हैं तो चलिए अब हम मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध पड़ते हैं।

मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध- meri priya pustak par nibandh
मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध- meri priya pustak par nibandh

◆ मेरे प्रिय पुस्तक पर निबंध ◆

प्रतावना:-

हमारे जीवन में ज्ञान की कमी को पूरा करने के लिए पुस्तक होते हैं पुस्तके हमें सारी जानकारी देती हैं और सभी लोगों का कोई न कोई प्रिय पुस्तक जरूर होता है जो उसे बहुत ही ज्यादा पसंद होता है।

मेरी प्रिय पुस्तक

मेरी प्रिय पुस्तक रामचरितमानस है यह गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर रचना है, रामचरितमानस को बहुत ही ज्यादा पवित्र माना जाता है इसे ज्यादातर हिंदू धर्म के लोग पढ़ते हैं।

इस किताब को पढ़ने के बाद एक अलग ही ज्ञान प्राप्त होता है जो कि आपके जीवन को जीने में बहुत ही आसान कर देता है इस किताब को पढ़ने से आपको बहुत सारे जानकारी के साथ-साथ आपकी कई सारे समस्याओं का समाधान भी मिल जाएगा।

इस किताब में श्री राम भगवान के जीवन के बारे में बताया गया है इसमें बताया गया है कि श्री राम अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए 14 वर्ष का वनवास कैसे किया था और उन्होंने अपने जीवन में कितने अच्छे और बड़े काम की है श्री राम ने अपने जीवन में कई सारे दुष्ट और अधर्मी राक्षसों का अंत किया और हमेशा शांति बनाए रखी।

रामचरितमानस किताब को पढ़ने से हमारे जीवन में चल रहे सभी बुराइयों का पता चल जाएगा जिसे हम दूर करके एक अच्छे व्यक्ति बन सकते हैं इस किताब को कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है। इस किताब में बताया गया है कि हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और हमें कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे किसी के ह्रदय को पीड़ा पहुंचे।

निष्कर्ष

हमें किताबें पढ़नी चाहिए क्योंकि किताबों से हमें मनोरंजन और ज्ञान दोनों मिलता है, मैं अपने प्रिय किताब रामचरितमानस को रोज पढ़ता हूं और जिससे मैं रोज नए-नए बातें सीखता हूं और अपने जीवन में उन सभी बातों पर ध्यान देता हूं। (मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध समाप्त)

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