होली पर निबंध – Essay on Holi In Hindi

Essay on Holi In Hindi

होली पर निबंध 700 शब्दो मे

प्रस्तावना

हिंदू धर्म में बहुत सारे त्यौहार हैं और इनमें से बहुत सारे मुख्य त्योहार हैं और एक मुख्य त्योहार होली भी है, जो हर साल फागुन के महीने में आता है होली एक रंगों का त्योहार है इस त्योहार पर सभी लोग रंगों और गुलालों से इस त्योहार को मनाते हैं।

होली का पर्व

होली का पर्व हर साल मार्च या अप्रैल के महीने में आता है इस त्यौहार पर सभी लोग रंगों और गुलालों से होली का त्यौहार मनाते हैं, होली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है यह त्यौहार सभी के जीवन में खुशहाली लेकर आता है।

और यह त्यौहार सबसे ज्यादा बच्चों को पसंद है क्योंकि उन्हें खेलकूद बहुत ही ज्यादा पसंद है और यह त्यौहार खेलकूद की तरह ही है। होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाई जाती है।

होली के पर्व पर सभी के घरों में अच्छे-अच्छे पकवान बनते हैं और होली के दिन सभी लोग नए-नए सफेद कपड़े पहन कर बाहर निकलते हैं और एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं और उसके बाद सभी छोटे बच्चे अपने बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और लोग गले मिलते हैं और एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं।

मैं भी होली के त्यौहार पर अपने दोस्तों के घर पर जाता हूं और वहां पर बहुत ही अच्छे अच्छे पकवान खाता हूं हमारे घर में भी मेरे दोस्त आते हैं और उन्हें भी मैं अच्छे-अच्छे पकवान खिलाता हूं और होली का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाता हूं।

हमारे यहां तो गाने बजा कर नाचा जाता है और इस होली के त्यौहार को और अच्छे से धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन होली के त्यौहार पर ज्यादा रंगों से नहीं खेलना चाहिए क्योंकि उसमें नुकसानदायक केमिकल मिले रहते हैं जो हमारे त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं होली खेलने के लिए अच्छे रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।

होलिका दहन

होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है होलिका दहन शाम के समय पूर्णमासी को होता है, पूर्णमासी का मतलब कि जिस दिन चंद्रमा पूरी तरह से निकलता है या दिखाई देता है उस रात को होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन करने के लिए बहुत सारे लकड़ी और कंडी इकट्ठा की जाती है। जब होलिका दहन किया जाने लगता है तब बहुत सारे लोग और बच्चे इकट्ठा होकर खुशियां मनाते हैं बच्चे सबसे ज्यादा खेलने कूदने लगता है और शोर मचाते हैं।

होलिका की कथा

होलिका दहन के पीछे बहुत पुरानी कथा है हिंदू मान्यता के अनुसार हिरण्यकश्यप नाम का राक्षस सभी मानव जाति पर अत्याचार करता था और उनसे जबरन अपनी पूजा करवाता था वह कहता था कि भगवान की पूजा ना करो केवल मेरी पूजा करो और जो लोग उसकी बात नहीं मानते थे उसे मृत्यु दंड दे दिया जाता था।

हिरण्यकश्यप ने कई सारे ऋषि-मुनियों को मार दिया था लेकिन उसने छोटे बालक भक्त प्रहलाद को नहीं मार पाया, हिरण्यकश्यप ने कई सारे प्रयास किए लेकिन वह भक्त प्रहलाद को नहीं मार पाया। जब भी हिरण्यकश्यप भक्त प्रहलाद को मारने की योजना बनाता तो विष्णु भगवान उस योजना को विफल कर देते थे क्योंकि भक्त प्रहलाद विष्णु भगवान का भक्त था।

खेड़ा कश्यप परेशान होकर होलिका नाम की राक्षसी को बुलाया और उससे कहा कि तुम प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग पर बैठ जाओ होलिका आग से नहीं जलती थी तो हिरना कश्यप ने सोचा कि प्रहलाद आग में जल जाएगा और होलिका अपनी शक्तियों से आग में नहीं जलेगी।

लेकिन जब होलिका ने भक्त प्रहलाद को अपने गोद में लेकर बड़े से लकड़ी के ढेर पर बैठ गई और फिर उस लकड़ी में आग लगा दिया गया लेकिन भक्त प्रहलाद विष्णु भगवान का नाम जपते हुए उस आग में बैठे रहे और उस आग में होलिका खुद जल गई लेकिन भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ।

इसीलिए होलिका दहन का त्यौहार मनाया जाता है और होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है ताकि सभी लोगों को यह पता रहे कि भक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं है।

उपसंघार

होली का पर्व बहुत ही अच्छा पर्व होता है इस पर्व पर बहुत ही ज्यादा मजा आता है क्योंकि इसमें हमें रंगों और गुलालो से खेलने को मिलता है और नाचने को भी मिलता है लेकिन होली का त्यौहार बड़ी सावधानी से मनाना चाहिए क्योंकि बाजार में केमिकल से मिले हुए रंग आ चुके हैं जो कि हमारे शरीर की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए हम लोग ज्यादातर गुलाल से होली खेलते हैं।

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